बरलूट, शुक्रवार दि.31 जनवरी
33 वर्ष की सेवा पूर्ण कर राजकीय उच्च माध्यमिक बरलूट से प्रधानाचार्य जगदीश कुमार नागर सेवानिवृत्त हुए। विद्यार्थियों में अपने शिक्षक की सेवानिवृत्ति को लेकर अलग ही भावनाएं थी, वे मंच सजाने में लगे थे। रंग-बिरंगे गुब्बारों और हार-फूलों से बच्चों ने मंच को सजा रखा था। ढोल-ढमाके की गूंज के साथ बच्चे अपने सर को मंच पर लाये। दीपक और रोली-कुमकुम का थाल लिए छात्रों ने सर का भव्य स्वागत सम्मान किया।

इस मौके पर विद्यार्थियों में अपने शिक्षक के प्रति सम्मान व्यक्त करने की होड़ मची थी। कोई पुष्पमाला अर्पित कर रहा था तो कोई चरण छूकर खुश हो रहा था। इतना प्यार और सम्मान पाकर शिक्षक जगदीश कुमार अभिभूत थे। साथी शिक्षकों, ग्रामीणों ने पुष्पाहार पहनाकर, श्रीफल भेंट किया। मुंह मीठा कराया। साथी शिक्षक स्टाफ से किसी ने उनकी समय की पाबंदी को ले कर, तो किसी ने उनके श्रेष्ठ कार्यों को रेखांकित किया।

विधालय परिवार उनके सेवा कार्यों को हमेशा याद रखेगा। उनकी कुशल कार्यक्षमता हमारें लिए प्रेरणास्तोत है। ये सेवानिवृत जरूर हुए हैं। पर सेवा दायित्वों से नहीं। इनके मार्गदर्शन की हमें हमेशा अपेक्षा रहेगी। उक्त बातें स्थानीय विधालय के शिक्षक सुल्तान सिंह चौहान ने विधालय प्रांगण में सेवानिवृत प्रधानाचार्य जगदीश कुमार नागर के विधाई समारोह को संबोधित करते हुए कही।

स्कूल का मंच सजाने से शुरु हुआ यह सिलसिला स्कूल से मुख्य बस स्टेंड तक सम्मान यात्रा निकाल कर सम्पन्न हुआ।
इस सम्मान यात्रा के दौरान छात्र छात्राएं, स्कूल स्टाफ़ ग्रामीणजन शामिल थे। अपने शिक्षक के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त कर रहे थे। सम्मान यात्रा के समापन तक विद्यार्थियों की आंखें नम हो गई थीं। उन्हें इस बात का एहसास था कि कल से सरजी स्कूल नहीं आयेंगे। नम आंखों से ग्रामीणजनों, शिक्षक शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों ने प्रधानाचार्य को विदाई दी।

विदाई समारोह में विद्यालय परिवार का स्टाफ, आमंत्रित मेहमान, ग्रामीण व विधार्थी उपस्थित रहें।

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